बेटे की बीमारी, अत्यधिक अधिकार-बोध और ज़िम्मेदारी की भावना ने माँ-बेटे के रिश्ते को और गहरा कर दिया। वे एक-दूसरे से बुरी तरह लिपट गए, मानो एक-दूसरे के ज़ख्म चाट रहे हों... इकलौते बेटे का तीखा रस उसके परिपक्व शरीर में उतर रहा था।
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