उनकी शादी को बीस साल बीत चुके थे। यूरी की बेटी बड़ी हो गई थी और एक सामान्य लेकिन खुशहाल ज़िंदगी जी रही थी। उसके पति के साथ उसके रिश्ते अच्छे थे, कोई ख़ास शिकायत नहीं थी। फिर, यूरी की मुलाक़ात अमानो से हुई, जो उसी विश्वविद्यालय में पढ़ने वाला एक कॉलेज छात्र था जहाँ उसकी बेटी पढ़ती थी। शुरुआत में, उनका रिश्ता सामान्य था। हालाँकि, अमानो को पहली नज़र में ही यूरी से प्यार हो गया। अमानो एक सच्चा और विनम्र युवक था, जो जानता था कि यह रिश्ता वर्जित है। इतनी ईमानदारी देखकर, यूरी को अपने बचपन की याद आ गई। "मैं यूरी-सान से सचमुच प्यार करती हूँ..." "तुम क्या कह रही हो?" "मुझे पता है कि तुम जो कह रही हो वह अजीब है, लेकिन यूरी-सान का एक पति और माओ-चान है। ...मुझे पता है कि प्यार एकतरफ़ा होता है..." "...अमानो-कुन..." "क्या हम आखिरी बार हाथ मिला सकते हैं?" "हम्म? ...मुझे क्या करना चाहिए..." "इसके साथ...मैं हार मान रही हूँ..." यूरी खुद को उसका हाथ थामे बिना नहीं रह सकी। उस पल, यूरी के अंदर जो उत्साह सुप्त पड़ा था, वह जाग उठा। एक ऐसा प्यार जो इतने सालों से भुला दिया गया था...इस भावना ने उनकी तार्किकता को दबा दिया, और एक निषिद्ध रिश्ता पनप गया।
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