सड़क पर... बंद कमरे में... ठंड में... तंबू में... सब औरत की गलती थी, क्योंकि वो नशे में थी! वो बलात्कार की हक़दार थी! सन्नाटे में, औरत की मीठी साँसें और कपड़ों के आपस में रगड़ने की आवाज़ साफ़ सुनाई दे रही थी, जबकि आदमी जानवर की तरह तेज़ी से धक्के मार रहा था, उसकी साँसें तेज़ चल रही थीं। [※तस्वीर और आवाज़ थोड़ी गड़बड़ा सकती है]
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