कंपनी की अध्यक्ष त्सुमुगी काम में असाधारण रूप से सफल रहीं, फिर भी उनके मन में असंतोष की भावना बनी रही। तभी एक युवा कर्मचारी आया, मानो उसने उनकी आंतरिक खालीपन को भांप लिया हो। उस व्यक्ति से बातचीत ने उनके भीतर एक अजीब सी सिहरन पैदा कर दी। उसके स्पर्श से उन्हें ऐसा लगा जैसे वह सब कुछ खोने वाली हों। उन्हें प्रभुत्व की तीव्र इच्छा होने लगी। उस क्षण से, कार्यालय एक शयनकक्ष में बदल गया। उन्होंने अपने पैर फैला दिए, उसे अपने ऊपर हावी होने दिया और आनंद में डूब गईं...
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