अत्सुशी का मन अब कामुक विचारों से भर गया था। लेकिन वह बेकाबू यौन इच्छाओं वाला एक बंदर था। उसे कोई प्रेमिका नहीं मिल रही थी, इसलिए वह अपनी बढ़ती हुई वासना को शांत करने के लिए केवल अपने दाहिने हाथ का ही इस्तेमाल कर सकता था। वह चाहे कोई भी हो, यह करना चाहता था! जब वह आखिरकार बेहद निराश हो रहा था और उसका दिमाग़ धुंधलाने लगा था, तभी उसकी माँ, एमी, कमरे में आईं। उनके हिलते हुए स्तन और उनकी गांड फटने ही वाली लग रही थी। अत्सुशी की नज़र में, उसकी माँ किसी अश्लील मंगा के कामुक शरीर जैसी थी...
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