मुझे माफ़ कर दो... अब और बर्दाश्त नहीं होता... एक विधवा के पति का कर्ज़ शर्मिंदगी का सबब होता है। तुम अपने पति का कर्ज़ तुरंत नहीं चुका सकती, है ना? मैं तुम्हें जल्दी पैसे कमाना सिखाऊँगी, चलो! अपने होंठ खोलो और चूसो! नहीं! मुझे माफ़ कर दो! अगर वो मना भी करे, तो भी उसके पति की मौत की सच्चाई और एक मर्द के रूखे स्पर्श का अकेलापन उन्हें सुखद बना सकता है। मरे हुए पति के साथ भी, एक विवाहेतर साथी अकेलेपन से राहत पा सकता है! वासना से भरा एक आदमी एक धोखेबाज़ विधवा के खिलाफ कार्रवाई करने वाला है! [*चित्र और ध्वनि का हस्तक्षेप]
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